जिसमें राष्ट्रपति शासन के बारे में बात कर रहे हैं आर्टिकल 356 राष्ट्रपति शासन का उल्लेख मिलता है यदि किसी राज्य में संविधान के अनुसार शासन नहीं चल रहा हो यानी संवैधानिक तंत्र या कॉन्स्टिट्यूशन मशीनरी की विफलता पर राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है और यही एकमात्र स्थिति है जिसके तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है
यह कैसे पता चलेगा कि कौन सा राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता हो रही है
गृह मंत्रालय बहुत सारे अलग-अलग विभाग और डिपार्टमेंट से कंबाइन रहता है इस डिपार्टमेंट को सभी राज्य का राज्यपाल हर 15 दिन में 15 दिन के पखवाड़े में एक रिपोर्ट भेजता है कितने विवाद आए एससी एसटी के मुद्दे पर कितने एफ आई आर दर्ज हुई हर संदर्भ में रिपोर्ट भेजता है होम मिनिस्ट्री को यह जानकारी है कि संबंधित राज्य में संवैधानिक तंत्र के अनुसार शासन नहीं चल रहा है इसकी जानकारी होम मिनिस्ट्री को राज्यपाल द्वारा मिलती है तो ऐसी स्थिति में उस राज्य के राज्य सरकार को हटा दिया जाएगा बर्खास्त कर दिया जाएगा और उसकी जगह पर राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाएगा आर्टिकल 356 राज्यपाल की रिपोर्ट की एकमात्र आधार नहीं होता यदि राष्ट्रपति को इस बात की जानकारी किसी भी डिपार्टमेंट से मिले फिर भी राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है साथ ही संबंधित राज्य की विधानसभा को भंग भी किया जा सकता है राज्यपाल राज्य में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर राज्य में शासन करता है जिस राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाती है तो उस राज्य में कानून बनाने की जिम्मेदारी संसद के पास आ जाती है
चलिए डिस्कशन को और आगे बढ़ाते हैं और बात करते हैं
आर्टिकल 355 और आर्टिकल 365 की संघ सरकार सेंट्रल गवर्नमेंट का दायित्व क्या है वह बाह आक्रमण से बचाए आंतरिक शांति कायम करें और संविधान की पालना करें और सुनिश्चित करें कि सब कुछ बढ़िया चल रहा है
आर्टिकल 365 संघ सरकार राज्य सरकार को किसी भी प्रकार का आदेश दे सकती है और यदि संबंधित राज्य इस आदेश को मानने से इंकार करती है तो यह मना माना जाएगा कि संबंधित सरकार के राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो गया है
आर्टिकल 356 राष्ट्रपति शासन की अवधि के बारे में बताता है कि बारे में भी बताता है राष्ट्रपति शासन संसद की अनुमति के बिना भी 2 महीने तक लगा सकते हैं इन 2 महीने के अंदर संसद से अनुमति जरूरी होती है यदि हम राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाना चाहते हैं तो संसद की अनुमति के बाद यह अवधि 6 महीने के लिए हावी हो जाता है 44 वा संविधान संशोधन द्वारा इस बात को रखा गया अनुमति नहीं मिलने पर ये स्वता ही समाप्त हो जाती है अपनी सामान्य बहुमत से अनुमति दे सकते हैं राष्ट्रपति शासन अधिकतम अवधि 1 साल तक रहता है विशेष परिस्थिति में अधिकतम 3 सालों तक हो सकती है
स्थिति क्या है जब हम राष्ट्रपति शासन लागू करते हैं स्थिति यदि पहले से 352 के तहत नेशनल इमरजेंसी किसी क्षेत्र विशेष में लगी हुई है तब इस स्थिति में यह अवधि अधिकतम 3 साल हो जाती है
आर्टिकल 324 चुनाव आयोग विधानसभा का चुनाव कराती है यदि चुनाव आयोग लिखकर दे तो उस स्थिति में भी अवधि बढ़ाई जा सकती है
पंजाब राज्य को छोड़कर वह लगातार 7 साल तक राष्ट्रपति शासन लगाया गया है आतंकी संगठन को इस क्षेत्र में देखते हुए या
इंटरेस्ट की बात यह है कि 26 जनवरी 1950 से लेकर 2018 तक अब तक 125 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है
संविधान निर्माता सोचते थे आप तो संघ सरकार को राज्य सरकार के गले की डोरी थमा रहे हो 356 बहुत विवाद में रहा लेकिन ऐसा नहीं है शासन ज्यादा से ज्यादा गंभीर स्थिति में हो तभी यह लागू की जाएगी
पहले पंजाब का नाम 1953 में पेप्सू यानी पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट यूनियन सबसे पहले राष्ट्रपति शासन लगाया गया था
10 बार उत्तर प्रदेश में और 9 बार मणिपुर स्टेट में राष्ट्रपति शासन लगाया गया सबसे अधिक समय तक 2000 दिनों तक पंजाब में 8 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है छत्तीसगढ़ और तेलंगाना यह तो एक ऐसे राज्य हैं जहां राष्ट्रपति शासन एक भी बार नहीं लगा है राजस्थान में 1967 1977 1980 1992 इन सनों में राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है
42वां संविधान संशोधन 1976 राष्ट्रपति शासन की अवधि 1 साल तक बढ़ा दी थी 44 वा संविधान संशोधन 1978 राष्ट्रपति शासन यहां से 1 साल से घटाकर 6 महीने दोबारा कर दिया गया
राष्ट्रपति शासन को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है उदाहरण 26 जनवरी 2016 अरुणाचल प्रदेश के मामले में March 2016 उत्तराखंड के मामले में इस बार हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन को बर्खास्त कर दिया था
जम्मू एंड कश्मीर आर्टिकल 370 विशेष राज्य का दर्जा देता है जम्मू एंड कश्मीर में राज्यपाल शासन लगता है और इसकी अवधि 6 महीने में से ज्यादा होने पर राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है बस नाम बदल जाता है
दिल्ली में राष्ट्रपति शासन आर्टिकल 356 के तहत राष्ट्रपति शासन नहीं लगता 69 वा संविधान संशोधन 1992 के तहत 2 नए आर्टिकल 239 के साथ जोड़े गए
239(AA) AND 239(AB) इसके तहत राष्ट्रपति शासन लगेगा यह लगता है
क्या दिल्ली में ISI article ki vajah se Rashtrapati shasan Delhi mein lagta hai इसका विस्तार से भी हम समझे तो हम एक मामला देखते हैं
ऐसा मुंबई वर्सेस यूनियन ऑफ द इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा राज्यपाल को इसका निर्णय राज भवन में नहीं विधान भवन में होनी चाहिए
आज हमने राष्ट्रपति शासन की स्थिति किस स्थिति में लागू की जाएगी और किस तरीके से समाप्त करने की प्रक्रिया है इसके बारे में हमने चर्चा किया इसके अगली पोस्ट में हम फाइनेंसियल इमरजेंसी के बारे में बात करेंगे जो कि राष्ट्रपति द्वारा लगाई जाती है तब तक अपना ख्याल रखिए धन्यवाद.......
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