राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां( Emergency power of president)

 चलिए बच्चों आज हम चर्चा करेंगे राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के बारे में इससे पहले हमने राष्ट्रपति की कूटनीतिक एवं सैन्य शक्तियों के बारे में चर्चा किया था तो चलिए विस्तार से इसके बारे में डिस्कशन करते हैं संविधान के 18 विभाग में राष्ट्रपति के आपात स्थिति से संबंधित कुछ शक्तियां प्रदान की गई हैं



1.इमरजेंसी पावर ऑफ प्रेसिडेंट जिसने शामिल है
1.राष्ट्रीय आपातकाल ( national emergency) 
2.राष्ट्रपति शासन और( president rule) 
3.वित्तीय आपातकाल ( financial emergency) 


चलिए देखते हैं इसकी स्थिति एवं सीमाएं क्या है

 आर्टिकल 352 आपातकाल की स्थिति का वर्णन करता है जिसमें बताया गया है कि कुछ ही कंडीशन पर आपातकाल लगाया जा सकता है 

जैसे वह आक्रमण युद्ध में शामिल हो जाने पर सशस्त्र विद्रोह भारत की जनता का कोई भाग यदि किसी हथियारों के साथ मिलकर विद्रोह कर दी इस स्थिति में भी आपातकाल की घोषणा की जा सकती है

 इन तीनों परिस्थितियों के वास्तविक रूप में ना होने पर भी आपातकाल लगाया जा सकता है कि केवल संभावना होने पर राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जा सकता है 


आज तक तीन बार नेशनल इमरजेंसी आपातकाल लगाई गई 1.पहला 1962 चीनी आक्रमण के समय डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 
2.एक दूसरी बार 1971 पाकिस्तान आक्रमण प्रधानमंत्री कV. P Giri 

3.प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन काल में 1975 आंतरिक असंतोष  के कारण इंदिरा गांधी की सरकार कांग्रेस द्वारा


 सन 1978 में मुराजी की सरकार आई उन्होंने 44 वा संविधान संशोधन के द्वारा मूल्य संविधान की आंतरिक असंतोष शब्द को हटाकर सशस्त्र विद्रोह कर दिया गया 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी की टेलीफोन से  से बात की और राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर 26 जून में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी इसे काला दिवस के रूप में भी मनाते हैं 


साथ ही 44 वा संविधान संशोधन द्वारा इस बात पर जोर दिया गया कि मंत्रिमंडल के लिखित सलाह पर ही राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जाएगा आर्टिकल 352 कैबिनेट में उल्लेखित नहीं है वह 44 वा संविधान संशोधन द्वारा इसका उल्लेख मिलता है जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल है




 National Emergency के बारे में आगे बढ़ते हैं और देखते हैं नेशनल इमरजेंसी की इफेक्टिव प्रभाव क्या है 


राष्ट्रीय आपातकाल को 1 महीने के अंदर संसद से सहमति जरूरी होती है यदि ऐसा नहीं होता तो सहमति नहीं मिलती वही आपातकाल खत्म हो जाता है 
आर्टिकल 352 इस बात का बखूबी वर्णन करता है सहमति सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित  और मतदान करने वाले बहुमत की दो तिहाई बहुमत से ही यह सहमति मिलेगी सहमति के बाद ही राष्ट्रीय आपातकाल आगे बढ़ सकता है संसद की एक बार सहमति से यह अवधि आपातकाल की 6 महीने जारी रख सकता है 

अधिकतम अनंत  समय तक आपातकाल लगाया जा सकता है लेकिन संसद से छह छह महीने बाद सहमति लेने पड़ेंगे यदि इस दौरान लोकसभा भंग हो जाती है
तो  स्थाई सदन राज्यसभा से अनुमति लेनी होगी जैसी लोकसभा गठित होगी उसी दिन से 30 दिन के अंदर लोकसभा से अनुमति लेनी होगी इन दिनों में यदि लोकसभा से अनुमति नहीं दी गई तो आपातकाल वही बंद हो जाती है इसका वर्णन 352 में बखूबी किया गया है







आपातकाल के बाद का प्रभाव 

हमारे मौलिक अधिकार छीने जा सकते हैं या उसका   हनन हो सकता है या निलंबित किए जा सकते हैं


 आर्टिकल 358 और 359 

आर्टिकल 358 के तहत आर्टिकल 19 राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति के में स्वता ही निलंबित हो जाएगा लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल सशस्त्र विद्रोह के आधार पर लगाया गया है तो 

आर्टिकल 19 निलंबित नहीं होगा वही यही बाकी आधार पर आर्टिकल 19 निलंबित हो सकता है 

आर्टिकल 359 इस बात को बताता है कि आर्टिकल 20 और 21 को छोड़कर सभी फंडामेंटल राइट निलंबित किए जा सकते हैं स्वता ही मौलिक अधिकार सस्पेंड नहीं होते यह राष्ट्रपति के कई आदेशों से मौलिक अधिकार को सस्पेंड करेगा या किया जाता है




एग्जांपल 1965 को राष्ट्रीय आपातकाल क्यों नहीं लगाया गया ?


क्योंकि 1962 की चीनी आक्रमण के कारण पहले से है लगा हुआ था 1962 से लेकर के 1968 तक



दूसरा एग्जांपल 1971 से 19 77 तक यह आपातकाल चला फिर 1975 में एक और इमरजेंसी क्यों लगाई गई ?

  वह इसलिए क्योंकि 1975 का राष्ट्रीय   इमरजेंसी आंतरिक असंतोष के कारण लगाई गई थी ना कि बाह आक्रमण की वजह से वह तो पहले से ही चल रहा था आपको पता होगा हमने स्थिति के बारे में जब डिस्कशन किया था तब इस बात को भी बताया था कि आंतरिक असंतोष इंटरनल डिस्टरबेंस की वजह से भी आपातकाल की घोषणा की जा सकती है




चलिए आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं आर्टिकल 250 कि यदि आर्टिकल 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल लगा दिया जाए तो राज्य सूची पर कानून बनाने का अधिकार संसद को मिल जाता है आर्टिकल 


 250 में इस बात का उल्लेख किया गया है समाप्ति के तरीके क्या रहेंगे

 राष्ट्रीय आपातकाल के समाप्ति के तरीके क्या रहेंगे चलिए आगे चर्चा करते हैं राष्ट्रपति के द्वारा कभी भी घोषणा करके इमरजेंसी हटाई जा सकती है इस संबंध में लोकसभा से 1 महीने के अंदर अनुमति मिल जाने पर 6 महीने के अंदर दोबारा अनुमति नहीं तो इमरजेंसी स्वता ही  समाप्त हो जाती है 

आर्टिकल 352 लोकसभा के कुल सदस्य संख्या का 1/10 सदस्य इस प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर के समक्ष रखते हैं और यदि संसद का सत्र नहीं चल रहा हो तो राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्ताव रख सकते हैं और राष्ट्रपति 14 दिन के अंदर लोकसभा की एक बैठक बुलाएगी  यदि उस बैठक में लोकसभा प्रस्ताव पारित कर देती है तो आपातकाल   हटाया जा सकता है संविधान संशोधन द्वारा यह आपातकाल किसी  Particular Place पर लगाया जा सकता है यह मूल संविधान में उल्लेखित नहीं है




 आज हमने राष्ट्रीय आपातकाल लगाने की स्थिति उसके प्रभाव और उसको हटाने की विधि के बारे में बखूबी अध्ययन किया मुझे आशा है कि आप अच्छे तरीके से समझ पाए होंगे इसके अगले पोस्ट में हम राष्ट्रपति शासन के बारे में बात करेंगे तब तक अपना ख्याल रखिए और पढ़ते रहिए विजिट करते रहिए धन्यवाद

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