सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और हाई कोर्ट के न्यायाधीश को नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा दिलाया जाता है वह व्यक्ति जो राष्ट्रपति के पद पर आधिकारिक तौर पर पदस्थ हो किसी कारणवश राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में हो तो वह दिलाता है सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को राष्ट्रपति द्वारा शपथ दिलाते हैं और चीफ जस्टिस अन्य न्यायाधीशों को शपथ दिलाते हैं भारत में वर्तमान में 25 हाईकोर्ट हैं और इनके नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं लिए साथ ही राष्ट्रपति हाई कोर्ट के जज का स्थानांतरण भी करते हैं
मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर राष्ट्रपति हाई कोर्ट के जज को शपथ नहीं दिलाते उसको संबंधित राज्य का राज्यपाल शपथ दिलाते हैं
आर्टिकल 72 इस बात को बखूबी से बताता है कि न्यायिक प्रक्रिया किस तरीके से चलेगी
पहुंचाई जाती है यदि आप सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट नहीं है इसमें आप क्षमा याचना डाल सकते हैं लेकिन राष्ट्रपति का यह निर्णय स्व विवेक नहीं होता राष्ट्रपति वही निर्णय लेता है जो मंत्री परिषद निर्णय देती है राष्ट्रपति के समक्ष आए क्षमा याचिका का निर्णय की अवधि संविधान में उल्लेखित नहीं है
👉
यदि संबंधित व्यक्ति राष्ट्रपति के निर्णय से ही संतुष्ट नहीं है दोबारा कोर्ट में मामला को ला सकता है और उसे कोर्ट रिलीज भी कर सकता है
प्रेसिपिटेशन राष्ट्रपति के द्वारा दी गई क्षमा याचिकाओं की शक्तियों के बारे में बताता है
राष्ट्रपति या तो सजा माफ कर सकता है
सजा को स्थगित कर सकता है
यह सजा को कम कर सकता है
सजा की प्रकृति बदल सकता है
आर्टिकल 72 के अंतर्गत दी जाने वाली अधिकार यह अधिकार है
सजा कम करना
स्थगित करना
य प्रकृति में परिवर्तन
लेकिन मृत्युदंड को अस्थाई रूप से निलंबित किया जाता है
राज्यपाल को भी यह अधिकार प्राप्त होता है लेकिन वह सजा को माफ नहीं कर सकता एग्जांपल मृत्युदंड
राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान जब दंड सेना न्यायालय द्वारा दिया गया हो संघीय विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध हो
मृत्युदंड की सजा हो
आर्टिकल 143 इस मामले में राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय से परामर्श ले सकता है इस पर सुझाव देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कॉन्स्टिट्यूशन बेंच य संविधान पीठ का गठन किया जाता है इसमें कम से कम 5 जजों के पीठ होती है यह जरूरी नहीं कि राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई परामर्श को सुप्रीम कोर्ट दे और यह भी जरूरी नहीं कि राष्ट्रपति Sc की परामर्श को माने
राष्ट्रपति स्वविवेक से वह मंत्रिपरिषद की सलाह दोनों से सुप्रीम कोर्ट का परामर्श ले सकता है
एग्जांपल बेरुबारी बाद 1958 पंडित जवाहरलाल प्लस पाकिस्तान के राष्ट्रपति गुलाब नूर के मध्य समझौता हुआ था पंडित जवाहरलाल राष्ट्रपति से इस विषय पर राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से सलाह मांगी थी राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट को परामर्श मांगा सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 368 जिक्र किया और परामर्श दिया
आज हम राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियों के बारे में विस्तार से चर्चा की इसके अगले पोस्ट में हम राष्ट्रपति के फाइनेंसियल यानी कि वित्तीय शक्तियों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे तब तक आप अपना ख्याल रखिए और पढ़ते रहिए प्ले लिस्ट ऑफ पॉलिटिकल साइंस धन्यवाद............ Pk25ng




0 Comments
Give me only suggestions and your opinion no at all Thanx