राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियां( financial power of president) 🎯

आज हम राष्ट्रपति को दी जाने वाली वित्तीय शक्तियों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे तो चलिए शुरू करते हैं



 धन विधेयक लाने की मनी बिल राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लोकसभा व राज्यसभा में जाते हैं उसके बाद वह पुनः राष्ट्रपति के पास आता है और इस बिल में राष्ट्रपति अनिवार्य रूप से स्वीकृति देगा वह यानी राष्ट्रपति से स्वीकार देने से इंकार नहीं कर सकते 






अब हम बात करते हैं धन विधेयक होता क्या है किसी से कोई कर लगाना हो या लगा हुआ है समाप्त करना है या कर की दर में वृद्धि करनी है या कमी करनी है उधार लेना है या उधार देना है इस प्रकार की बिल को  धन विधेयक कहते हैं इसका उल्लेख आर्टिकल 111 में बखूबी मिलता है 





अब हम बात करते हैं संचित निधि या निधि  fund  की में  सारा पैसा निधि में एकत्रित होते हैं और 

संचित निधि लोक निधि व आकस्मिक निधि 




एक-एक करके इनके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं आर्टिकल 267 के अनुसार आकस्मिक निधि पर राष्ट्रपति का अधिकार होता है इस निधि से एक पैसा भी यदि खर्च करना हो तो राष्ट्रपति की स्वीकृति बहुत जरूरी रहती है सारा पैसा संचित निधि में जमा होता है और वह सारी पैसा जो संचित निधि में जमा होता है वह पैसा जनता का है यहां से चाहे प्रधानमंत्री भी तो पैसा नहीं निकाल सकता उसे संसद की अनुमति जरूरी होती है और यदि संसद का सत्र नहीं चल रहा है तो इस स्थिति में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति की स्वीकृति से   आकास्मिक निधि से पैसा ले सकता है 





आर्टिकल 280 राष्ट्रपति हर 5 साल में 1 वित्त आयोग का गठन करेगा इसमें से एक अध्यक्ष और अन्य चार सदस्य होते हैं किसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है फाइनैंशल कमेटी बनाता है और राज्य  और केंद्र सरकार के मध्य  निधि का बंटवारा कैसे होगा इस बात   के बारे में बात  करता है वित्त आयोग सिफारिश करता है इन सिफारिशों को राष्ट्रपति संसद में रखवता  आते हैं यह राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियों के अंतर्गत आता है 



 आज हमने राष्ट्रपति को दी जाने वाली वित्तीय शक्तियों के बारे में विस्तार से चर्चा की इसके अगले पोस्ट में हम राष्ट्रपति की कूटनीतिक शक्तियां यानी डिप्लोमेटिक पावर और सैन्य शक्तियों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे तब तक अपना ख्याल रखें और पढ़ते रहिए धन्यवाद

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