राष्ट्रपति COM कौंसिल ऑफ मिनिस्टर मंत्रिपरिषद की सलाह पर महान्यायवादी की नियुक्ति व शपथ का कार्य राष्ट्रपति करता है
महान्यायवादी पद का उल्लेख आर्टिकल 76 में है
प्रसादपर्यंत मतलब महान्यायवादी तब तक पद पर रहेंगे जब तक राष्ट्रपति इन्हें रखना चाहेगा
राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर सीएजी की नियुक्ति करेंगे शपथ दिलाएंगे लेकिन प्रसादपर्यंत की सुविधा राष्ट्रपति के पास नहीं रहती सीएजी को संसद के द्वारा जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है उसी तरह सीएजी को हटाया जाता है
साथ ही मंत्री परिषद के सिफारिश पर 29 स्टेट के राज्यपाल साथ दिल्ली प्लस पांडुचेरी + Andman Nicobar में तीन उप गवर्नर होते हैं 29 स्टेट के गवर्नर की नियुक्ति लेफ्टिनेंट गवर्नर केंद्र शासित प्रदेश में एडमिनिस्ट्रेटर होते हैं उनकी नियुक्ति भी राष्ट्रपति करते हैं और यह सभी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पर रहते हैं
मैं जानता हूं लेकिन इन्हें राष्ट्रपति शपथ नहीं दिलाता शपथ सुप्रीम कोर्ट के जज दिलाते हैं
आर्टिकल 74 निम्न बातों का उल्लेख करता है
राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी
राष्ट्रपति की मंत्रिपरिषद का प्रमुख प्रधानमंत्री होगा
मंत्री परिषद की एडवाइस को राष्ट्रपति एक बार पुनः विचार के लिए भेज सकता है
भारत सरकार के समस्त कार्यपालिका कार्यवाही राष्ट्रपति के नाम से जानी जाती हैं फिर भी राष्ट्रपति नाम मात्र का कार्यपालिका प्रधान होता है क्योंकि कार्यपालिका की वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री व मंत्रिमंडल के पास होती है
संघीय कार्यपालिका में शामिल होते हैं
राष्ट्रपति
प्रधानमंत्री
मंत्रिमंडल व
महान्यायवादी
राष्ट्रपति को दी जाने वाली शक्तियां यह दो प्रकार की होती हैं एक होती है
और दूसरी होती है इमरजेंसी पावर
जनरल या सामान्य शक्तियां के अंतर्गत
कार्यपालिका शक्ति या
विधायी शक्तियां
वित्तीय शक्तियां
न्यायिक शक्तियां
कूटनीतिक शक्तियां
और
सेंन्य शक्तियां शामिल है
एक-एक कर हम सबको ध्यान से देखते हैं और समझते हैं यह शक्तियां क्या है और राष्ट्रपति किन कंडीशन या सीमाओं पर इनका उपयोग करता है
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