समानता का अधिकार अनुच्छेद 14 से लेकर 18 तक कुल 5 आर्टिकल हैं
इसके अंतर्गत अनुच्छेद 14 जोकि विधि शब्द की व्याख्या करता है
विधि के समक्ष समानता-कानून सभी के लिए बराबर होंगे किसी के साथ भेदभाव
नहीं किया जाएगा
किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा विधि शब्द के उदाहरण
हमने इंग्लैंड से लिया है वहां के एक विधान जायसी की बुक द रूल ऑफ लॉ
विधियों का सम्मान संरक्षण होना चाहिए और यह अवधारणा हमने u.s.a. से लिया है
यह एक नकारात्मक धारणा है कि फिजिकल हैंडीकैप सिविक सामान्य नागरिक
की तरह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता इससे अलग नियम देना पड़ेगा अनुच्छेद 14 यह कहता हैकि राज्य अलग अलग वर्गों के
साथ अलग अलग व्यवहार कर सकती हैं इसका आधार जैसे \\
बच्चों के लिए अलग नियम
महिलाओं के लिए अलग नियम
एससी-एसटी और ओबीसी तथा
विकर सेक्शन ऑफ द सोसाइटी के लिए अलग नियम राज्य यदि चाहे
तो लागू कर सकता है
यह Equal प्रोडक्शन ऑफ ला कहता है कि राज्य अलग अलग वर्गों के साथ अलग अलग व्यवहार कर सकती हैं लेकिन
आर्टिकल 15
जो कि निम्न बातों का उल्लेख करता है
लेकिन राज्य निम्न आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता
नागरिक की जाति धर्म मूल वंश लिंग व जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव
नहीं किया जाएगा यह आर्टिकल 15 इस बात का उल्लेख करता है
हमारे सारे सार्वजनिक स्थान जैसे कुआ तालाब नल सभी वर्गों के लिए
समान रूप से खुले रहेंगे लेकिन
आर्टिकल 15 की धारा 3 के -
अंतर्गत यह है यदि बात महिलाओं की हो बच्चों को लेकर हो तो राज्य सरकार इन
के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है यदि वह चाहे तब
आर्टिकल 15 की धारा 4-
26 जनवरी 1950 में जब भारतीय संविधान का निर्माण हुआ तब तमिलनाडु राज्य
अस्तित्व में नहीं था वहां मद्रास राज्य अस्तित्व में था तब वहां के राज्य सरकाद्वारा एक आदेश जारी किया गया
मद्रास के लोगों के लिए जिसे संप्रदायिक आदेश के अंतर्गत कहा गया इस आदेश
के अंतर्गत कहा गया कि
वहां के लोगों में जाति के आधार पर अलग-अलग सीटें रिजर्व की गई थी
वहां की एक लड़की जिसका मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिला इस संप्रदाय आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और यह आदेश रद्द कर दिया गया
यदि हम देखें देवराजन मामला 1951-
जाति के आधार पर शिक्षण संस्थानों में प्रवेश नहीं दिए जा सकते इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय सेभारतीय संविधान में प्रथम संशोधन हुआ और इसके द्वारा अनुच्छेद 15 में धारा
4 जोड़ा गया साथ ही प्रथम संशोधन में अनुसूची 9 वी को भी जोड़ा ग
आर्टिकल 15 की धारा 4में लिखा हुआ है
एसटी एससी और सोशल एजुकेशन के आधार पर पिछड़े हुए लोगों के लिए राज्य
शिक्षण के क्षेत्र में रिजर्वेशन
का प्रावधान कर सकती हैं यह ओरिजिनल कॉन्स्टिट्यूशन का भाग नहीं है अनुच्छेद 15 की धारा 4
आर्टिकल 15 की धारा 5 -
यह रिजर्वेशन उच्च शैक्षणिक संस्थानों में यह व्यवस्था नहीं थी सन 2006 में
एम्स दिल्ली में एक बहुत बड़ा आंदोलन छेड़ा गया जैसे
आईआईटी आईआईएम ए एम एम एस में यह व्यवस्था नहीं थी
मांग उच्च शैक्षणिक संस्थानों में भी रिजर्वेशन होनी चाहिए
और हमने इस तरह उच्च शैक्षिक संस्थानों में भी यह व्यवस्था लागू करने के
लिए संविधान में 93 संविधान संशोधन किया
इस संशोधन के द्वारा भारतीय संविधान में आर्टिकल 15 के तहत धारा 5 को
जोड़ा गया और इस तरह उच्च शैक्षणिक संस्थानों में भी रिजर्वेशन के प्रावधान की गई एक और मामला हम देखेंगे
अशोक कुमार ठाकुर वर्सेस यूनियन ऑफ द इंडिया 2008- और इस मामले में
सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह बिल्कुल
सही हैं यह संविधान के आधारभूत संरचना का उल्लंघन नहीं करता इसलिए इसमें
संविधान संशोधन किया जा सकता है यह किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हो रहा सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्णय इसलिए कहा क्योंकि संविधान में ऐसा कोई संशोधन नहीं किया जा सकता यह संविधान कैसे भाग में कोई संशोधन नहीं किया जा सकता जो संविधान के आधारभूत संरचना का उल्लंघन करें ठीक यह मामला समानता के अधिकार के तहत आता है जो कि हमारे मौलिक अधिकार का भाग है इसलिए इसे आम जनता सुप्रीम कोर्ट में चुनौती ना दे इस कारण सुप्रीम कोर्ट में इस बात का उल्लेख किया अशोक कुमार ठाकुर वर्सेस यूनियन ऑफ द इंडिया मामला 2008 में
आर्टिकल 16- यह निम्न बातों का उल्लेख करता है
रोजगार में मैं अवसर की समानता आप के पांच आधार सहित दो और
आधार उद्भव निवास के आधार पर राज्य सरकार भेदभाव नहीं करेगा
आर्टिकल 16 की धारा 3
यदि राज्य चाहे तो निवास के आधार पर भेदभाव कर सकता है
लेकिन इस संदर्भ में कानून बनाने का अधिकार केवल संसद को ही है
जैसे 98 संविधान संशोधन के अंतर्गत अनुच्छेद 371 [j]जोड़ा गया इसके
अंतर्गत कर्नाटक के राज्यपाल को विशेष शक्ति दिया गया कर्नाटक हैदराबाद रीजन में निवास कर रहे लोगों को सर्विस सेक्टर में प्राथमिकता दे सकता है
आर्टिकल 16 की धारा 4 यह सर्विस सेक्टर में रिजर्वेशन का आधार क्या होगा
वह कौन से लोग होंगे जो इस एरिया में आएंगे वह लोग जो अपर्याप्त प्रतिनिधित्व में हैं सर्विस सेक्टर में उनके लिए राज्य रिजर्वेशन की व्यवस्था कर सकती हैं
आर्टिकल 340 यह बताती है कि राष्ट्रपति एक आयोग का गठन करेंगे जो यह
पता लगाएगा कि आर्थिक और निर्धनता शैक्षणिक तौर पर गरीब कौन है इस बात का जिक्र करता है
जैसे 1953 में काका कलेश्वर आयोग और इस आयोग ने कहा पिछड़े लोगों को
रिजर्वेशन देना चाहिए
दूसरा एग्जांपल मोरारजी देसाई जब देश के प्रधानमंत्री थे तब इनकी सरकार ने 1978 में
बी पी मंडल विंदेश्वरी प्रसाद
जो बिहार के बहुत बड़े नेता थे यह 1979 से काम शुरू करेगा यह मंडल भी 340 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया था मंडल में 1980 में सिफारिश दी तब इंदिरा गांधी की सरकार आ गई थी और इस मंडल आयोग पर ध्यान नहीं दिया गया
अगस्त 1990 विश्वनाथ प्रसाद की सरकार में बीपी मंडल की सिफारिश के
आधार पर
27 % रिजर्वेशन दिया
मध्य प्रदेश में यह रिजर्वेशन
ओबीसी को 27 %
SC को 15 %
और ST को 7.5%
मध्य प्रदेश में यह रिजर्वेशन ओबीसी को 27 परसेंट एससी को 15 परसेंट
और एसडी को 7.5% रिजर्वेशन का
प्रावधान है यह रिजर्वेशन की प्रतिशत राज्य के कुल अनुसूचित जाति के
लोगों की संख्या के आधार पर तय की गई इसमें 29 राज्यों के सभी अनुसूचित जाति के लोगों का Ratio के आधार पर 15 पर सेंट रिजर्वेशन अनुसूचित जाति को दिया गया
इंदिरा साहनी वर्सेस भारत संघ यह मामला 1992
का है 16 नवंबर 1992 सुप्रीम कोर्ट निर्णय दी यह रिजर्वेशन मामला
सबसे बड़ा मामला है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई कोर्ट ने कहा ओबीसी को पिछड़ेपन के लोगों को रिजर्वेशन दिया जा सकता है
यह रिजर्वेशन सामाजिक और शैक्षणिक के आधार पर हो सकती हैं पर
आर्थिक कंडीशन के आधार पर नहीं साथ ही रिजर्वेशन की अधिकतम सीमा 50 परसेंट होगी सर्विस सेक्टर के क्षेत्र में
बाकी के 50 परसेंट में कोई भी वर्ग अप्लाई कर सकता है परंतु प्रमोशन के मामले
में कोई रिजर्वेशन लागू नहीं होगा लेकिन विशेष परिस्थितियों में यह प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है और हम इसे तमिलनाडु राज्य में देख सकते हैं
वहां रिजर्वेशन की कुल प्रतिशत 69 है
1995 में 76 संविधान संशोधन हुआ और इस संशोधन के अंतर्गत यह
कानून तमिलनाडु सरकार
को रिजर्वेशन दिया गया और इसे नौवीं अनुसूची में डाल दिया गया नौवीं
अनुसूची में शामिल कानून को न्यायपालिका में चुनौती नहीं दिया जा सकता
केशवानंद भारती वर्सेस केरल राज्य 24 अप्रैल 1973
26 जनवरी 1950 से पहले वाले कानून यदि नौवीं अनुसूची में शामिल है तो
संविधान के आधार भूत संरचना का उल्लंघन करता है कोई बात नहीं लेकिन इसके बाद यदि कोई कानून नौवीं अनुसूची में जोड़ा गया पर वह संविधान
के आधारभूत संरचना का उल्लंघन करता है यदि कोई इस बात को कोर्ट में
चुनौती करता है तो कोर्ट अपने निर्णय के आधार पर इस चुनौती को रद्द कर देगी यदि आधारभूत संरचना को उल्लंघन करता है तमिलनाडु में 69%
रिजर्वेशन को भी लोगों ने कोर्ट में चैलेंज किया लेकिन कोर्ट ने कहा तमिलनाडु में विशेष परिस्थितियां हैं और यह बात और इस चुनौती को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी
आर्टिकल 17
छुआछूत की समाप्ति के बाद कर दी है जैसे सिविल राइट प्रोटक्शन एक्ट 1955 20
मार्च 2018 एसक
महाजन वर्सेस भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा एसटी एससी एक्ट 1989 के
संदर्भ में शेड्यूल कास्ट शेड्यूल ट्राइब्स अत्याचार अधिनियम 1989 राजीव गांधी की सरकार ने बनाया था इसका आधार भी आर्टिकल 17 ही है
आर्टिकल 18 इसके
अंतर्गत 1.
अस्पृश्यता कानून
2. उपाधियों का अंत
3. लोक नियोजन
4.बोलने की स्वतंत्रता का अधिकार देता है
आज हमने समानता की स्वतंत्रता के तहत आर्टिकल 14 से लेकर 18 तक अध्ययन किया हमारा अगला पोस्ट
स्वतंत्रता का अधिकार राइट टू फ्रीडम आर्टिकल 19 -22 चार आर्टिकल शामिल होंगे धन्यवाद……………
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